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Nitya Karm Puja Prakash Pdf | पूजा कर्म प्रभाकर PDF

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Nitya Karm Puja Prakash Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से नित्य कर्म पूजा प्रकाश पीडीएफ डाउनलोड कर सकते  हैं।

 

 

 

Nitya Karm Puja Prakash Pdf 

 

 

 

 

 

 

 

 

एक किसान था। उसे कोई संतान नहीं थी। उस किसान का नाम राजेंद्र था। राजेंद्र शिव भक्त था। वह अपना प्रत्येक कार्य शिव स्मरण के साथ ही शुरू करता था। उसकी औरत का नाम विमला था।

 

 

 

वह भी अपने पति के कार्यो में हमेशा हाथ बंटाती रहती थी। एक दिन रात में राजेंद्र ने स्वप्न देखा कि एक महात्मा उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दे रहे है। समय बीतता गया विमला ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया।

 

 

 

उसका नाम सुंदरम रखा गया। सुंदरम जब दस वर्ष का हुआ तो उसके पिता राजेंद्र ने उसका साथ छोड़ दिया। अपने पिता की तरह वह भी खेती का कार्य करने लगा।

 

 

 

कुछ समय उपरांत उसकी माता ने एक सुशील कन्या के साथ उसका विवाह कर दिया था। उसके बाद विमला भी अपने पति के पास चली गई।

 

 

 

सुंदरम के खेत में बहुत अच्छी फसल हुई थी। उसे बाजार में बेचने के लिए सुंदरम ले गया लेकिन बाजार में उसकी फसल नहीं बिक पाई।

 

 

 

सुंदरम अब घर की तरफ लौट चला तो उसे रास्ते में एक भिखारी मिला जो भूख से तड़प रहा था। वह भिखारी सुंदरम से बोला, “क्या तुम मुझे खाने के लिए कुछ दे सकते हो ?”

 

 

 

तब सुंदरम ने कहा, “बाबा हमारे पास इस समय यह चावल की बोरी है जिसे मैं बाजार में बेचने के लिए गया था। लेकिन कोई खरीदने वाला नहीं मिला। अगर आप कहे तो मैं इसमें से चावल निकालकर दे दूंगा।”

 

 

 

भिखारी ने कहा, “ठीक है, यह चावल ही हमे दे दो।”

 

 

 

सुंदरम ने दो किलो के करीब चावल उस भिखारी को शिव का नाम लेते हुए दे दिया। सुंदरम भी अपने पिता की तरह ही शिव भक्त था। भिखारी ने एक मुट्ठी चावल अपने मुंह में खा लिया और बाकी का चावल चिडियो को खिला दिया।

 

 

 

भिखारी के पास पहनने के लिए वस्त्र नहीं थे अधनंगा शरीर था। तब सुंदरम ने अपने सिर के ऊपर से पगड़ी उतार कर उस भिखारी को दे दिया था। भिखारी ने उस पगड़ी के कपडे को कई टुकड़ो में बांट दिया और अपने हाथ-पैर और शरीर पर लपेट लिया।

 

 

 

सुंदरम ने घर पहुंचकर देखा तो वह भिखारी उसके पीछे-पीछे चला आ रहा था। तब सुंदरम ने अपनी औरत से भोजन बनवाकर उस भिखारी को खिलाया। चलते समय वह भिखारी अपनी झोली से एक राख की पुड़िया देते हुए कहा, “इसे अपने घर के अन्न में रख देना तुम्हारा घर सदैव हर तरह से परिपूर्ण रहेगा।”

 

 

 

सुंदरम ने उसे अपने अन्न गृह में चावल के पात्र में रख दिया। उसके बाद से सुंदरम को किसी प्रकार का अभाव नहीं था। वह भिखारी कोई और नहीं स्वयं औढरदानी भोलेनाथ थे। सुंदरम आजीवन शिवभक्ति करते हुए सबकी सहायता करता था और अंत में शिव धाम चला गया।

 

 

 

पूजा कर्म प्रभाकर Pdf Download

 

 

 

 

Nitya Karm Puja Prakash Pdf
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